Advertisement

TET EXAM PRACTICE HINDI : लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य वन लाइनर नोट्स

TET EXAM PRACTICE HINDI : लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य वन लाइनर नोट्स


TET EXAM PRACTICE HINDI : लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य वन लाइनर नोट्स


हिन्दी:लिंग, वचन, कारक, काल, वाच्य वन लाइनर नोट्स
अध्यापक का लिंग परिवर्तन शब्द है— अध्यापिका
‘रचयिता’ का लिंग परिवर्तन शब्द है—रचयित्री
खालींग-पूर्णिंग की दृष्टि से अनुचित है—तीतर-तीतरीन
‘बहुवचन’ कहते हैं—शब्द के जिस रूप में एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं आदि का बोध हो
यह शब्द सदैव बहुवचन में ही होता है—दर्शन
‘से’ विभक्ति इस कारक के लिए प्रयुक्त होता है—करण
‘नाव जल में तैरती है’ में कारक है—अधिकरण कारक
‘हिमालय से गंगा निकलती है’ में इस कारक का प्रयोग हुआ है—अपादान
‘ने’ ............ इस कारक की विभक्ति है।कर्ता
‘पेड़ से पत्ते गिरते हैं’ में कारक है—अपादान
‘विमल नहाने को गया’ वाक्य में कारक है—सम्प्रदान
वृक्ष से पत्ते गिरते हैं। इस कथन में ‘से’ ............ का विभक्ति चिन्ह है।अपादान कारक
‘हेमंत को खीर अच्छी लगती है’— वाक्य इस कारक का उदाहरण है—कर्मकारक
परसर्ग कहते हैं—कारक चिह्नों को
अपादान कारकयुक्त वाक्य है—बच्चे बंदर से डरते हैं
‘लोटा छत से गिरा’ में कारक है—अपादान
‘सीता स्कूल गयी है’ यह वाक्य ............ को दर्शाता है।आसन्न भूतकाल
यह वाक्य सामान्य वर्तमान काल का है—वह कलकत्ता जाता है।
भविष्य काल से इस समय का बोध होता है—आने वाले समय
“यदि निशा आई होती तो मैं अवश्य चलता” वाक्य में भूतकाल है—हेतूहैतुक भूत
“उससे बैठा नहीं जाता है” में वाच्य है—भाववाच्य
“मुझसे उठा नहीं गया” वाक्य में वाच्य है—भाववाच्य
जिस वाक्य में क्रिया का सम्बन्ध कर्ता से हो वह वाक्य कहलाता है—कर्तृवाच्य
‘मैं चुप नहीं बैठ सकती’ उक्त वाक्य भाववाच्य में होगा—मुझसे चुप नहीं बैठा जाता।

Post a Comment

0 Comments