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TET EXAM : उत्तर प्रदेश में 4 वर्ष से टेट नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, दिया यह आदेश

TET EXAM : उत्तर प्रदेश में 4 वर्ष से टेट नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, दिया यह आदेश


सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक अर्हता परीक्षा (TET) अनिवार्य करने के फैसले पर कायम रहकर शिक्षकों की टेंशन बढ़ा दी है। वहीं, साल में दो बार TET करने का आदेश भी दिया है। अब शिक्षा सेवा चयन आयोग भी इस कसौटी पर कसा जाएगा और उसे खरा उतरना होगा। वजह यह कि फिलहाल तो चार साल से प्रदेश में परीक्षा ही नहीं हुई।

TET EXAM : उत्तर प्रदेश में 4 वर्ष से टेट नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, दिया यह आदेश


ऐसे अनिवार्य हुई TET


कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने के लिए हर शिक्षक को बीएड/बीटीसी के साथ ही TET करना अनिवार्य है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 2011 में TET को अनिवार्य किया गया था। उससे पहले जो शिक्षक पढ़ा रहे है, उनके लिए तब TET अनिवार्य नहीं थी। उनमें से कुछ का प्रमोशन भी हो गया और वे जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ा रहे है। उनके लिए भी जूनियर TET अलग से करना होता है।

अभी नैशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की गाइडलाइन के अनुसार सभी शिक्षको को TET करना जरूरी है। उसी के खिलाफ शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

शिक्षकों का तर्क है कि जब नौकरी लगी थी, तब TET की अनिवार्यता नहीं थी। उसे बाद में उन पर कैसे थोपा जा सकता है?

वही, सुप्रीम कोर्ट ने अब TET करने के लिए समय सीमा तो एक साल बढ़ा दी है लेकिन उसे पास करना अब भी अनिवार्य है।


आखिरी बार 2022 में हुई थी TET


अब यूपी में समस्या यह है कि यहां चार साल से अब तक TET ही नहीं हुई।

इससे पहले यहां आखिरी बार 2021 में TET के लिए आवेदन मागे गए थे। उसमें भी पेपर लीक हो गया था। वह परीक्षा आखिरी बार 2022 में हुई थी।

तब से कई बार टलने के बाद अब दो से चार जुलाई तक यह परीक्षा प्रस्तावित है।


पहले से भी यह नियम है कि TET साल में दो बार होनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने फिर यह निर्देश दिए हैं। जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश शिक्षकों पर लागू होता है तो सरकार और आयोग पर भी लागू होना चाहिए। - विनय कुमार सिंह, अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन


पौने दो लाख शिक्षकों पर असर

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य होने के इस फैसले से यूपी में करीब पौने दो लाख बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक प्रभावित होंगे। इसके अलावा राजकीय और एडेड से सम्बद्ध प्राइमीरी और निजी स्कूलों को भी जोड़ लिया जाए तो यह संख्या पाच लाख से अधिक हो जाती है।

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