NEW TRANSFER POLICY : यूपी में लागू हुयी नयी तबादला नीति, जानें शिक्षकों पर नयी नीति का असर
अब एक स्कूल में दो सहायक अध्यापक रहेंगे ही रहेंगे 60 से कम पर तीसरे शिक्षक सरप्लस होंगे, रिक्ति के आधार पर कहीं भी भेज सकेगी जनपद चयन समिति।
1. उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही शुरू हुई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विशेष अपील संख्या 398/2026 सौरभ कुमार सिंह व 06 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य में दिनांक 22 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश पारित किया, जिसमें यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम दो शिक्षक अवश्य तैनात हों।
2. यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A और शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 की धारा 25 के अंतर्गत आता है, जो हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। RTE Act 2009 के Schedule के अनुसार 60 तक छात्र संख्या वाले प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम 2 शिक्षक, 61 से 90 छात्रों पर 3 शिक्षक और 91 से 120 छात्रों पर 4 शिक्षक अनिवार्य हैं — फिर भी UP के सैकड़ों विद्यालय कथित रूप से इस मानक को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
3. माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा अनुभाग-5 ने शासनादेश संख्या 2251/68-5-2026, दिनांक 04 मई 2026 को जारी किया। यह पत्र अपर मुख्य सचिव श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा लखनऊ से प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों को संबोधित किया गया है और इसमें चरणबद्ध कार्यवाही की समय-सीमा के साथ स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
4. सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि UDISE पोर्टल पर दिनांक 30.04.2026 को उपलब्ध डेटा का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। UDISE भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का आधिकारिक स्कूल डेटा प्रबंधन पोर्टल है, जिसमें देशभर के 15 लाख से अधिक विद्यालयों का डेटा दर्ज है। इस पोर्टल के डेटा और जमीनी हकीकत में कथित अंतर ही इस पूरे विवाद की जड़ बताई जाती है।
5. यह भौतिक सत्यापन विद्यालय में कार्यरत प्रधानाध्यापक अथवा वरिष्ठ अध्यापक और संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाएगा। जहां प्रधानाध्यापक का पद रिक्त हो, वहां वरिष्ठतम अध्यापक हस्ताक्षर करेगा। और यदि किसी विद्यालय में एक भी शिक्षक तैनात न हो जो कि एक बेहद गंभीर स्थिति है तो उस विद्यालय का डेटा संबंधित BEO और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा संयुक्त रूप से सत्यापित किया जाएगा।
6. प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए अलग-अलग चार्ट प्रारूप निर्धारित किए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय के चार्ट में विद्यालय का नाम, स्वीकृत पद संख्या, वर्तमान में तैनात शिक्षकों के नाम, योगदान तिथि, 30.04.2026 की वास्तविक छात्र संख्या और RTE Act के अनुसार अधिशेष (surplus) शिक्षकों की संख्या व नाम दर्ज होंगे। उच्च प्राथमिक विद्यालय के चार्ट में यह विवरण विषयवार (भाषा, विज्ञान/गणित, सामाजिक अध्ययन) भरा जाएगा।
7. सत्यापित डेटा को दिनांक 06 मई 2026 तक जनपद की आधिकारिक वेबसाइट — जैसे prayagraj.nic.in पर अपलोड करना अनिवार्य है। साथ ही, यह डेटा संबंधित विद्यालयों के माध्यम से प्रभावित शिक्षकों को भी व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे अपने स्थानान्तरण की जानकारी समय से प्राप्त कर सकें।
8. जिन शिक्षकों का पुनर्तैनाती (redeployment) प्रस्तावित है, वे दिनांक 13 मई 2026 तक ऑफलाइन माध्यम से जिला स्तरीय समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यदि वेबसाइट पर डेटा प्रकाशन में देरी होती है, तो प्रकाशन की तारीख से 07 दिन की अतिरिक्त अवधि आपत्ति दर्ज करने के लिए मिलेगी।
9. महिला शिक्षिकाओं के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए न्यायालय ने आदेश दिया है कि यदि किसी महिला अध्यापिका को पुनर्तैनात किया जाना हो, तो जिला स्तरीय समिति सर्वप्रथम उन्हें उसी विकास खंड में तैनात करने का प्रयास करेगी। यदि वह संभव न हो, तो उनके निवास स्थान के निकटतम अच्छी सड़क से जुड़े विकास खंड में तैनाती दी जाएगी।
10. जिला स्तरीय समिति जो शासनादेश दिनांक 14 नवंबर 2025 के अंतर्गत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित है, UDISE के सत्यापित डेटा के आधार पर ही अधिशेष शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में पुनर्तैनात करेगी, ताकि हर विद्यालय में न्यूनतम दो शिक्षक सुनिश्चित हो सकें। जहां पहले से दो या अधिक शिक्षक तैनात हैं, वहां किसी भी गैर-अधिशेष शिक्षक को इस कवायद में शामिल नहीं किया जाएगा।
11. इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह मामला माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दिनांक 22 मई 2026 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। अतः समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अपने जनपद में की गई संपूर्ण कार्यवाही की सूचना दिनांक 20 मई 2026 तक ई-मेल upefaspo@gmail.com पर अनिवार्य रूप से भेजें क्योंकि न्यायालय इस अनुपालन रिपोर्ट की जांच करेगा।
12. शासनादेश की प्रतिलिपि महानिदेशक स्कूल शिक्षा उ0प्र0 लखनऊ, शिक्षा निदेशक (बेसिक) उ0प्र0 लखनऊ, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज और प्रदेश के समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है। अब देखना यह है कि इस आदेश का जमीनी स्तर पर कितना और कितनी जल्दी पालन होता है।
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स्रोत: शासनादेश संख्या 2251/68-5-2026, बेसिक शिक्षा अनुभाग-5, उत्तर प्रदेश शासन, दिनांक 04 मई 2026 | इलाहाबाद उच्च न्यायालय आदेश दिनांक 22 अप्रैल 2026, विशेष अपील संख्या 398/2026

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