"प्रोविजो का वो मायाजाल जिसमें फंस गए शिक्षक; कोर्ट ने दो टूक कहा- 'अब और रियायत नहीं, सिर्फ क्वालिटी एजुकेशन!'"
माननीय न्यायमूर्ति ने स्पष्ट कहा कि जिनकी उम्र 55 वर्ष या इससे अधिक है मैने उनको राहत दे दिया है।
श्री पटवालिया जी ने कहा कि पदोन्नति में टीईटी लगे लेकिन एनसीटीई नोटिफिकेशन का पैरा 4 और 5 सेवा में बने रहने के लिए टीईटी से छूट देता है। सर्विस रूल को एलाऊ करता है।
सुप्रीम कोर्ट में टेट अनिवार्यता पर आज बड़ी सुनवाई, 25 लाख शिक्षकों के भविष्य पर फैसला सुरक्षित
1. आज सुप्रीम कोर्ट परिसर से टेट अनिवार्यता मामले की सुनवाई का अपडेट महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मामला देश के लगभग 25 लाख शिक्षकों के भविष्य, सेवा-सुरक्षा और पेशेवर अस्तित्व से और हमारे प्रोमोशन की आशा से जुड़ा हुआ है।
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2. आज दोपहर 2 बजे 1 सितंबर के आदेश के खिलाफ दायर रिव्यू याचिकाओं पर सुनवाई हुई, और यह सुनवाई इसलिए बेहद महत्वपूर्ण रही क्योंकि रिव्यू याचिकाएं सामान्यतः इन-चैंबर सुनी जाती हैं, जबकि इस बार खुली अदालत में सुनवाई हुई।
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3. कोर्ट में हुई बहस से साफ हुआ कि न्यायालय ने याचिकाओं में उठाए गए बिंदुओं को गंभीरता से लिया, तभी इस मामले को ओपन कोर्ट में विस्तार से सुना गया।
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4. आज की सुनवाई में अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी, सलमान खुर्शीद, अमित कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शिक्षक पक्ष की ओर से अदालत में विस्तार से अपनी दलीलें रखीं।
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5. कोर्ट के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा गया कि धारा 23 के प्रावधान और 2017 के संशोधन की सही व्याख्या यही है कि 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टेट अनिवार्यता लागू नहीं होती, जबकि 2010 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के संदर्भ में अलग स्थिति बनती है।
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6. यह भी तर्क रखा गया कि 2017 के संशोधन के अनुसार 2010 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों को TET योग्यता प्राप्त करने के प्रश्न पर विचार होना चाहिए, न कि 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों पर इसे समान रूप से लागू माना जाए।
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7. बहस के दौरान NCTE Act में 2012 के संशोधन का भी उल्लेख किया गया और यह कहा गया कि बाद के संशोधनों को उन्हीं नियुक्तियों पर लागू माना जाना चाहिए जिन पर वे विधिक रूप से लागू होते हैं।
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8. अदालत ने शिक्षक पक्ष के सभी प्रमुख कानूनी बिंदुओं को नोट किया है और सुनवाई के अंत में फैसला सुरक्षित रख लिया गया है, इसलिए अब अंतिम स्थिति न्यायालय के आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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9. सुनवाई में कुछ राज्यों, जिनमें पश्चिम बंगाल का भी उल्लेख हुआ, की ओर से यह मुद्दा उठाया गया कि पात्रता परीक्षा आयोजित करने के लिए जो दो वर्ष की अवधि दी गई थी, उसे बढ़ाकर चार वर्ष किया जाए।
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10. इस बिंदु पर भी अदालत ने विचार किया है, इसलिए अब मामला केवल टेट अनिवार्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय-वृद्धि दिए जाने के प्रश्न से भी जुड़ गया है।
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11. शिक्षक पक्ष की ओर से यह भी मजबूती से रखा गया कि RTE Act लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टेट अनिवार्यता के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए, क्योंकि उनकी नियुक्ति उस समय की गई थी जब यह व्यवस्था अस्तित्व में नहीं थी।
12. आज की पूरी सुनवाई के बाद 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना नगण्य है, 2010 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों की स्थिति पर न्यायिक स्पष्टता आ सकती है, और राज्यों द्वारा मांगे गए अतिरिक्त समय पर भी महत्वपूर्ण आदेश आ सकता है या हो सकता है कि 1 सितम्बर 2027 ही अंतिम सत्य हो।
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