तीन दिन से कम मेडिकल लीव पर मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी नहीं?

 तीन दिन से कम मेडिकल लीव पर मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी नहीं?




सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए मेडिकल अवकाश (Medical Leave) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। हाल ही में Supreme Court of India में इस विषय पर सुनवाई के दौरान एक अहम टिप्पणी सामने आई, जिसमें छोटी अवधि की बीमारी पर मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को लेकर चर्चा हुई।

यह मामला पहले Industrial Tribunal के पास गया था, जहां कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला दिया गया था।

इस खबर को समझना हर कर्मचारी के लिए जरूरी है क्योंकि अक्सर छोटी बीमारी पर भी मेडिकल सर्टिफिकेट की मांग कर दी जाती है।

क्या था पूरा मामला?

मामले की शुरुआत तब हुई जब एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों से छोटी अवधि की बीमारी (1-2 दिन) के लिए भी मेडिकल सर्टिफिकेट मांगना अनिवार्य कर दिया।

कर्मचारियों ने इसे अनुचित बताते हुए मामला इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में पहुंचाया।

ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?

Industrial Tribunal ने अपने फैसले में कर्मचारियों के पक्ष में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।

ट्रिब्यूनल की प्रमुख टिप्पणियां

✅ 1 दिन या बहुत कम समय की बीमारी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट मांगना उचित नहीं है।

✅ छोटी बीमारी में हर कर्मचारी डॉक्टर के पास नहीं जाता।

✅ सामान्य सर्दी-जुकाम या हल्की बीमारी में कर्मचारी घर पर आराम करके ठीक हो जाता है।

✅ ऐसे मामलों में मेडिकल सर्टिफिकेट अनिवार्य करना कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालना है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि कम समय की बीमारी के लिए कर्मचारी के स्वयं के बयान को पर्याप्त माना जा सकता है।

कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

ट्रिब्यूनल के इस फैसले से असहमत होकर कंपनी ने Supreme Court of India में अपील दायर की।

कंपनी का तर्क था:

⚠️ यदि मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई तो कर्मचारी छुट्टियों का गलत उपयोग कर सकते हैं।

⚠️ इससे अनुशासन पर असर पड़ेगा और कर्मचारी बिना कारण छुट्टी ले सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने कर्मचारियों के पक्ष में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा:

✔️ छोटी बीमारी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट मांगना व्यावहारिक नहीं है।

✔️ हर छोटी बीमारी में डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं होता।

✔️ ऐसी स्थिति में मेडिकल सर्टिफिकेट की अनिवार्यता कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानी दे सकती है।

✔️ ट्रिब्यूनल का फैसला उचित और तर्कसंगत है।

अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील को खारिज कर दिया।


कर्मचारियों के लिए क्या मायने?

इस निर्णय से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

संभावित प्रभाव:

📌 छोटी बीमारी के लिए बार-बार मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने की जरूरत कम हो सकती है।

📌 कर्मचारियों को अनावश्यक डॉक्टर विजिट से राहत मिल सकती है।

📌 कार्यस्थल पर छुट्टी को लेकर व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की उम्मीद बढ़ेगी।

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