फर्जी अभिलेखों से नौकरी पाने वाले 254 शिक्षकों की फिर होगी जांच
औरैया: जिले में संदिग्ध अभिलेखों के आधार पर नौकरी पाने वाले 254 शिक्षकों की डिग्री और प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की जाएगी। इस संबंध में पार्थ सारथी सेन शर्मा (अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा) की ओर से जारी पत्र के बाद उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
दरअसल, अदालत के निर्देश पर प्रदेशभर के परिषदीय विद्यालयों में नियुक्त सहायक शिक्षकों की नियुक्तियों की व्यापक जांच कराने का फैसला लिया गया है।
254 शिक्षकों के दस्तावेजों पर संदेह
जिले में पहले भी फर्जी अभिलेखों के जरिए नौकरी पाने के सात मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा 254 शिक्षकों को संदिग्ध सूची में रखा गया था, जिनके दस्तावेजों की अब दोबारा जांच होगी।
जांच के दौरान विशेष रूप से इन बिंदुओं की पड़ताल की जाएगी:
- शैक्षिक डिग्री और प्रमाणपत्र
- प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था
- नियुक्ति की तिथि
- दिव्यांगता प्रमाणपत्र की सत्यता
- अब तक की गई विभागीय कार्रवाई
अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच
अपर मुख्य सचिव के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ मामलों में संस्थानों के प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही भी सामने आई है।
यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका पाई जाती है तो उनके खिलाफ विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं कई मामले
जिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं:
- साल 2019: एसआईटी जांच में 7 शिक्षकों की बीएड डिग्री फर्जी पाई गई, जिसके बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।
- साल 2020: अछल्दा और एरवाकटरा ब्लॉक के 4 शिक्षकों पर फर्जी प्रमाणपत्र के मामले में एफआईआर दर्ज हुई।
- साल 2021: अजीतमल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय ऊंचा में तैनात शिक्षक मनोज कुमार एसआईटी जांच में दस्तावेज नहीं दिखा सके, जिसके बाद उन्हें सेवा से हटा दिया गया।
- साल 2022: बिधूना क्षेत्र में दो शिक्षकों पर फर्जी अभिलेखों के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की भी होगी जांच
शासन के निर्देश पर वर्ष 2020 में 254 शिक्षकों की दिव्यांगता की जांच भी शुरू की गई थी, लेकिन कई शिक्षकों ने जांच में भाग नहीं लिया।
अब कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश स्तर पर व्यापक जांच होने जा रही है, जिससे पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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