कक्षा एक और दो की जगह दूसरे बच्चों का हो रहा निपुण आकलन

कक्षा एक और दो की जगह दूसरे बच्चों का हो रहा निपुण आकलन



परिषदीय विद्यालय में शुरू किए निपुण आकलन में शिक्षक मनमानी पर उतारू हैं। कक्षा एक और दो की जगह विद्यालय के दूसरे बच्चों का निपुण आकलन कराया जा रहा है। शिक्षकों के दबाव के कारण डायट के प्रशिक्षुओं को निपुण आकलन में दिक्कत हो रही है।

जिले के 1966 परिषदीय विद्यालयों के कक्षा एक और दो के बच्चों का निपुण आकलन किए जाने का आदेश शासन ने दिया है। निपुण आकलन की जिम्मेदारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षुओं को दी गई है। विद्यालय पहुंचने पर शिक्षक कक्षाओं में एक और दो के बच्चों को नहीं बैठा रहे हैं। उनके स्थान पर चार और पांच के बच्चों को बैठाया जा रहा है ताकि रिपोर्ट खराब तैयार न हो।

प्रशिक्षुओं का आरोप है कि विरोध करने पर शिक्षक धमकी तक दे रहे हैं।

मजबूरी में नियम के अनुसार बच्चों का निपुण आकलन नहीं हो पा रहा है। दरअसल, शासन परिषदीय विद्यालयों के कक्षा एक व दो के बच्चों की मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान दक्षता की जांच करने के लिए निपुण आकलन करा रहा है। निपुण भारत मिशन के तहत अभियान की शुरूआत की गई है ताकि पढ़ने, लिखने और गणित जैसे विषयों में निपुण बनाने के उद्देश्य से यह मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

निपुण आकलन का कार्य बेहतर ढंग से हो रहा है। यदि किसी विद्यालय में जोर जबरदस्ती प्रशिक्षुओं के साथ की जा रही है तो शिकायत मिलने पर दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भूपेंद्र सिंह, बीएसए

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